नई दिल्ली। आतंकवाद का रास्ता छोड़कर सेना में शामिल होने वाले लांस नायक नजीर वानी को अशोक चक्र अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा. ये पहला मौका है जब आतंक की नापाक राह से लौटे किसी जवान को देश के इतने बड़े सम्मान से नवाजने का निर्णय लिया गया है.

 

नजीर वानी ने 2004 में आत्मसमर्पण किया था. इसके कुछ वक्त बाद ही नजीर ने भारतीय सेना ज्वॉइन कर ली थी. कभी सेना के खिलाफ लड़ने वाले इस बहादुर जवान ने आतंकवादियों से लड़ते हुए नवंबर, 2018 में अपनी जान वतन के नाम कुर्बान कर दी थी.

 

दरअसल, पिछले साल नवंबर में शोपियां में कुछ आतंकियों के छुपे होने की खबर पर सुरक्षाबलों की टीम उन्हें मौत के घाट उतारने पहुंची थी. इस दौरान 6 आतंकवादियों ने एक घर में शरण ली थी, जिसे जवानों ने चारों तरफ से घेर लिया था. आतंकियों पर प्रहार करते हुए नजीर वानी ने एक दहशतगर्द को मार गिराया था. जबकि जवाबी फायरिंग में वह खुद भी घायल हो गए थे.

 

 

 

आतंकियों की गोली से जख्मी होने के बावजूद नजीर वानी ने उस घर में छुपे आतंकियों को भागने नहीं दिया. लांस नायक नजीर आतंकियों के भाग निकलने के रास्ते पर डटे रहे और उन्होंने एक और आतंकी को मौत के घाट उतार दिया. हालांकि, इस ऑपरेशन में दहशतगर्दों की गोलियां का निशाना बने नजीर वानी भी शहीद हो गए.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनी फॉक्सवैगन को शुक्रवार शाम 5 बजे तक 100 करोड़ रुपये का जुर्माना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) के पास जमा कराने का आदेश दिया है. एनजीटी ने सख्त लहजे में कहा कि अगर यह रकम शुक्रवार तक फॉक्सवैगन कंपनी ने नहीं जमा कराई, तो कंपनी के एमडी को गिरफ्तार किया जाएगा.

फॉक्सवैगन कंपनी से ये जुर्माना इसलिए वसूला जा रही है, क्योंकि कार बनाने वाली इस कंपनी ने डीजल वाहनों में कार्बन उत्सर्जन कम दिखाने के लिए हेर-फेर करने वाली डिवाइस लगा दी थी. इस गड़बड़ी के कारण सड़कों पर चलती फॉक्सवैगन की गाड़ियों ने पर्यावरण में प्रदूषण फैलाया और उन नियमों का पालन नहीं किया, जो प्रदूषण को रोकने के लिए कार निर्माता कंपनी को करना अनिवार्य होता है.

इस मामले के सामने आने के बाद NGT ने जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी, जिसने पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन किया था. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद एनजीटी ने फॉक्सवैगन कंपनी पर 171 करोड़ का जुर्माना लगाया था. हालांकि, इस जुर्माने को भरने के बजाय फॉक्सवैगन कंपनी ने एनजीटी के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी थी, लेकिन मामले में शीर्ष अदालत ने कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया था. सर्वोच्च अदालत ने जुर्माने की रकम को भरने को लेकर कंपनी को कोई स्टे नहीं दिया और मामले की सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख तय कर दी.

इसके बाद गुरुवार को एनजीटी ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी को निर्देश दिया कि वह 100 करोड़ रुपये की रकम या तो शुक्रवार शाम 5 बजे तक जमा कराए या फिर गंभीर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहे. अगर कंपनी ने एनजीटी के आदेशों का पालन करते हुए गुरुवार तक 100 करोड़ रुपये की रकम नहीं चुकाई, तो कंपनी के एमडी की गिरफ्तारी से लेकर भारत में फॉक्सवैगन कंपनी की संपत्तियों को जब्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है.

फॉक्सवैगन कंपनी ने पहली बार साल 2015 में माना था कि उसने साल 2008 से साल 2015 के बीच दुनियाभर में बेची गई एक करोड़ 11 लाख गाड़ियों में 'डिफीट डिवाइस' लगाई थी. इस डिवाइस की खासियत ये है कि यह लैब परीक्षण के दौरान फॉक्सवैगन तारों को पर्यावरण के मानकों पर खरा साबित कर देती थी, जबकि सच्चाई ये थी कि फॉक्सवैगन कार नाइट्रिक ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन ज्यादा कर रही थीं. यह उत्सर्जन यूरोपीय मानकों से चार गुना अधिक था.

फॉक्सवैगन को इस हेर-फेर के कारण अब तक अलग-अलग जगहों पर अरबों रुपये का जुर्माना देना पड़ा है. कंपनी सिर्फ जर्मनी में ही करीब 8,300 करोड़ रुपये का जुर्माना भर चुकी है. साथ ही कंपनी के कुछ शीर्ष अधिकारियों को इस मामले में जेल भी हो चुकी है. अब भारत में भी फॉक्सवैगन कंपनी की मुश्किल बढ़ गई है.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनी फॉक्सवैगन को शुक्रवार शाम 5 बजे तक 100 करोड़ रुपये का जुर्माना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) के पास जमा कराने का आदेश दिया है. एनजीटी ने सख्त लहजे में कहा कि अगर यह रकम शुक्रवार तक फॉक्सवैगन कंपनी ने नहीं जमा कराई, तो कंपनी के एमडी को गिरफ्तार किया जाएगा.

 

फॉक्सवैगन कंपनी से ये जुर्माना इसलिए वसूला जा रही है, क्योंकि कार बनाने वाली इस कंपनी ने डीजल वाहनों में कार्बन उत्सर्जन कम दिखाने के लिए हेर-फेर करने वाली डिवाइस लगा दी थी. इस गड़बड़ी के कारण सड़कों पर चलती फॉक्सवैगन की गाड़ियों ने पर्यावरण में प्रदूषण फैलाया और उन नियमों का पालन नहीं किया, जो प्रदूषण को रोकने के लिए कार निर्माता कंपनी को करना अनिवार्य होता है.

 

इस मामले के सामने आने के बाद NGT ने जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी, जिसने पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन किया था. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद एनजीटी ने फॉक्सवैगन कंपनी पर 171 करोड़ का जुर्माना लगाया था. हालांकि, इस जुर्माने को भरने के बजाय फॉक्सवैगन कंपनी ने एनजीटी के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी थी, लेकिन मामले में शीर्ष अदालत ने कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया था. सर्वोच्च अदालत ने जुर्माने की रकम को भरने को लेकर कंपनी को कोई स्टे नहीं दिया और मामले की सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख तय कर दी.

 

इसके बाद गुरुवार को एनजीटी ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी को निर्देश दिया कि वह 100 करोड़ रुपये की रकम या तो शुक्रवार शाम 5 बजे तक जमा कराए या फिर गंभीर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहे. अगर कंपनी ने एनजीटी के आदेशों का पालन करते हुए गुरुवार तक 100 करोड़ रुपये की रकम नहीं चुकाई, तो कंपनी के एमडी की गिरफ्तारी से लेकर भारत में फॉक्सवैगन कंपनी की संपत्तियों को जब्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है.

 

फॉक्सवैगन कंपनी ने पहली बार साल 2015 में माना था कि उसने साल 2008 से साल 2015 के बीच दुनियाभर में बेची गई एक करोड़ 11 लाख गाड़ियों में 'डिफीट डिवाइस' लगाई थी. इस डिवाइस की खासियत ये है कि यह लैब परीक्षण के दौरान फॉक्सवैगन तारों को पर्यावरण के मानकों पर खरा साबित कर देती थी, जबकि सच्चाई ये थी कि फॉक्सवैगन कार नाइट्रिक ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन ज्यादा कर रही थीं. यह उत्सर्जन यूरोपीय मानकों से चार गुना अधिक था.

 

फॉक्सवैगन को इस हेर-फेर के कारण अब तक अलग-अलग जगहों पर अरबों रुपये का जुर्माना देना पड़ा है. कंपनी सिर्फ जर्मनी में ही करीब 8,300 करोड़ रुपये का जुर्माना भर चुकी है. साथ ही कंपनी के कुछ शीर्ष अधिकारियों को इस मामले में जेल भी हो चुकी है. अब भारत में भी फॉक्सवैगन कंपनी की मुश्किल बढ़ गई है.

 

पहली बार चांद पर कोई पौधा उगाया गया है. चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि चैंगे-4 मिशन ने कपास का पौधा उगाने में सफलता हासिल की है. अंतरिक्ष रिसर्च के क्षेत्र में ये एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

चैंगे-4 पहला ऐसा मिशन है जो चंद्रमा के दूरस्थ स्थलों का जायजा लिया. वे जगहें जो धरती से काफी दूरी पर हैं. चैंगे-4 मिशन 3 जनवरी को चंद्रमा पर पहुंचा था. इसका उद्देश्य चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करना था. इससे पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पौधा उगाया गया था, लेकिन चंद्रमा पर नहीं. इस सफलता के बाद आने वाले दिनों में लंबे स्पेस मिशन के दौरान साइंटिस्ट पौधे उगाने की और कोशिशें करेंगे.

इसका मतलब ये हुआ है कि एस्ट्रोनॉट भविष्य में अंतरिक्ष में अपने लिए खाना उगाने में सक्षम हो सकते हैं. इससे सप्लाई के लिए जल्दी धरती पर वापस आने की जरूरत खत्म हो सकती है. चीन के मून लैंडर के जरिए कपास और आलू के बीज भेजे गए थे. पौधे सील किए हुए कंटेनर में उगाए गए हैं. पौधे उगाने में सफलता से ये भी संभावना बढ़ी है कि अंतरिक्ष में सेल्फ सस्टेनिंग एन्वायरमेंट बनाया जा सकता है.

चीन के लुनर मिनी बायोस्फेयर एक्सपेरिमेंट को इस तरह से डिजायन किया गया था जिससे फोटोसिंथेसिस और रेस्पिरेशन प्रोसेस को टेस्ट किया जा सके. इन प्रोसेस के जरिए ही इनर्जी का प्रोडक्शन होता है. ये पूरा एक्सपेरिमेंट 18 सेमी लंबे, 3 किलो के कंटेनर में हुआ. इसे चीन की 28 यूनिवर्सिटी ने मिलकर तैयार किया था.

कंटेनर के भीतर पानी, हवा की सप्लाई की व्यवस्था थी. हालांकि, साइंटिस्ट के लिए सबसे बड़ी मुश्किल टेंपरेचर को कंट्रोल में रखना था. क्योंकि चांद पर -173C से 100C के बीच तापमान में अंतर होता है.

पहली बार चांद पर कोई पौधा उगाया गया है. चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि चैंगे-4 मिशन ने कपास का पौधा उगाने में सफलता हासिल की है. अंतरिक्ष रिसर्च के क्षेत्र में ये एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

 

चैंगे-4 पहला ऐसा मिशन है जो चंद्रमा के दूरस्थ स्थलों का जायजा लिया. वे जगहें जो धरती से काफी दूरी पर हैं. चैंगे-4 मिशन 3 जनवरी को चंद्रमा पर पहुंचा था. इसका उद्देश्य चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करना था. इससे पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पौधा उगाया गया था, लेकिन चंद्रमा पर नहीं. इस सफलता के बाद आने वाले दिनों में लंबे स्पेस मिशन के दौरान साइंटिस्ट पौधे उगाने की और कोशिशें करेंगे.

 

इसका मतलब ये हुआ है कि एस्ट्रोनॉट भविष्य में अंतरिक्ष में अपने लिए खाना उगाने में सक्षम हो सकते हैं. इससे सप्लाई के लिए जल्दी धरती पर वापस आने की जरूरत खत्म हो सकती है. चीन के मून लैंडर के जरिए कपास और आलू के बीज भेजे गए थे. पौधे सील किए हुए कंटेनर में उगाए गए हैं. पौधे उगाने में सफलता से ये भी संभावना बढ़ी है कि अंतरिक्ष में सेल्फ सस्टेनिंग एन्वायरमेंट बनाया जा सकता है.

 

चीन के लुनर मिनी बायोस्फेयर एक्सपेरिमेंट को इस तरह से डिजायन किया गया था जिससे फोटोसिंथेसिस और रेस्पिरेशन प्रोसेस को टेस्ट किया जा सके. इन प्रोसेस के जरिए ही इनर्जी का प्रोडक्शन होता है. ये पूरा एक्सपेरिमेंट 18 सेमी लंबे, 3 किलो के कंटेनर में हुआ. इसे चीन की 28 यूनिवर्सिटी ने मिलकर तैयार किया था.

 

कंटेनर के भीतर पानी, हवा की सप्लाई की व्यवस्था थी. हालांकि, साइंटिस्ट के लिए सबसे बड़ी मुश्किल टेंपरेचर को कंट्रोल में रखना था. क्योंकि चांद पर -173C से 100C के बीच तापमान में अंतर होता है.

सलामी बल्लेबाज शिखर धवन का मानना है कि हार्दिक पंड्या की मौजूदगी टीम के संतुलन के लिए जरूरी है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरा और निर्णायक वनडे शुक्रवार को खेला जाएगा. पहले दो मैचों में खलील अहमद और मोहम्मद सिराज के नाकाम रहने से टीम संयोजन में बदलाव लाजमी है. धवन ने दोनों युवा तेज गेंदबाजों का बचाव किया, लेकिन कहा कि संतुलन के लिए टीम में हरफनमौला का होना जरूरी है.

भारत को पंड्या की कमी खल रही है जो एक टीवी शो पर अश्लील बयानबाजी के बाद से निलंबित हैं. धवन ने मैच से पूर्व प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,‘हार्दिक के होने से जो संतुलन बनता है, वह काफी अहम है.’ उन्होंने कहा,‘केदार जाधव के खेलने पर भी उनकी ऑफ स्पिन के ओवर काफी अहम होंगे. मैं कहूंगा कि वह हमारा ‘गोल्डन आर्म’ है और हमेशा विकेट लेता है. उन्होंने अक्सर बड़ी साझेदारियां तोड़ी हैं. टेस्ट और वनडे दोनों में हरफनमौला काफी अहम होता है.’


खलील और सिराज के बारे में उन्होंने कहा कि वे अनुभव के साथ निखरेंगे. उन्होंने कहा ,‘उनकी गेंदबाजी को लेकर कोई चिंता नहीं है. वे अभी नए हैं और अनुभव के साथ सीखेंगे. हमें उनका साथ देना है, ताकि वे अपनी गलतियों से सबक लेकर परिपक्व बनें.' धवन ने कहा कि टेस्ट सीरीज जीतने के बाद अब भारतीय टीम वनडे सीरीज भी जीतकर इतिहास रचना चाहती है.

आखिरी जंग के लिए कंगारू टीम में 2 बदलाव, जानिए किसे निकाला

उन्होंने कहा,‘सीरीज जीतना काफी जरूरी है. टेस्ट और वनडे दोनों जीतना बड़ी उपलब्धि होगी. हमने पिछले मैच में शानदार टीम प्रदर्शन किया खासकर महेंद्र सिंह धोनी का प्रदर्शन बेहतरीन रहा. हमें खुशी है कि धोनी ने अपनी लय हासिल कर ली है. उनके जैसा बल्लेबाज दूसरे छोर पर बल्लेबाज को आत्मविश्वास देता है.’

शुक्रवार के मैच के बारे में उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई टीम को स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर की कमी खल रही है, जबकि भारत को भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी के अनुभव का फायदा मिल रहा है. उन्होंने कहा ,‘ऑस्ट्रेलिया अच्छी संतुलित टीम है, हालांकि उन्हें स्मिथ और वॉर्नर की कमी खल रही है. वहीं हमारे पास भुवी और शमी के रूप में अनुभवी गेंदबाज हैं और हम पहले दस ओवर में दबाव बना लेते हैं.’

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खलील और सिराज के बारे में उन्होंने कहा कि वे अनुभव के साथ निखरेंगे. उन्होंने कहा ,‘उनकी गेंदबाजी को लेकर कोई चिंता नहीं है. वे अभी नए हैं और अनुभव के साथ सीखेंगे. हमें उनका साथ देना है, ताकि वे अपनी गलतियों से सबक लेकर परिपक्व बनें.' धवन ने कहा कि टेस्ट सीरीज जीतने के बाद अब भारतीय टीम वनडे सीरीज भी जीतकर इतिहास रचना चाहती है.

 

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उन्होंने कहा,‘सीरीज जीतना काफी जरूरी है. टेस्ट और वनडे दोनों जीतना बड़ी उपलब्धि होगी. हमने पिछले मैच में शानदार टीम प्रदर्शन किया खासकर महेंद्र सिंह धोनी का प्रदर्शन बेहतरीन रहा. हमें खुशी है कि धोनी ने अपनी लय हासिल कर ली है. उनके जैसा बल्लेबाज दूसरे छोर पर बल्लेबाज को आत्मविश्वास देता है.’

 

शुक्रवार के मैच के बारे में उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई टीम को स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर की कमी खल रही है, जबकि भारत को भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी के अनुभव का फायदा मिल रहा है. उन्होंने कहा ,‘ऑस्ट्रेलिया अच्छी संतुलित टीम है, हालांकि उन्हें स्मिथ और वॉर्नर की कमी खल रही है. वहीं हमारे पास भुवी और शमी के रूप में अनुभवी गेंदबाज हैं और हम पहले दस ओवर में दबाव बना लेते हैं.’

 

Why cheat india box office collection day 1 इमरान हाशमी और श्रेया धनवंतरि स्टारर फिल्म वाय चीट इंड‍िया 18 जनवरी को र‍िलीज होने जा रही है. फिल्म में इमरान की लंबे समय बाद बाद वापसी फैंस के ल‍िए एक बड़ी ट्रीट है. फिल्म के गाने पहले से ही चर्चा में हैं. हालांकि फिल्म का व‍िषय काफी द‍िलचस्प है. फिल्म का निर्देशन सोमिक सेन ने किया है. इसका भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, तनुज गर्ग और अतुल कस्बेकर ने प्रोडक्शन किया है.

र‍िपोर्ट्स के मुताब‍िक इमरान हाशमी की फिल्म पहले द‍िन 3 से 4 करोड़ रुपये के साथ खाता खोल सकती है. बीते द‍िनों फिल्म के नाम को लेकर व‍िवाद हुआ था. सेंसर बोर्ड का कहना था कि फिल्म के नाम से देश की न‍िगेट‍िव इमेज को द‍िखाया जा रहा है. इस वजह से फिल्म का नाम प्रोड्यूसर्स को बदलना पड़ा. अब देखना ये होगा कि फिल्म को व‍िवाद का कितना फायदा मिलता है.


फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर टक्कर

इमरान हाशमी की फिल्म को अरशद वारसी की फ्रॉड सैय्यां और गोविंदा की रंगीला राजा टक्कर देने के लिए तैयार है. दोनों ही फिल्मों में बड़े स्टार नहीं हैं ऐसे में बॉक्स ऑफ‍िस पर कड़ी टक्कर देखने को नहीं मिलेगी. लेकिन गोव‍िंदा की फैन फालोइंग को कम आंका नहीं जा सकता है.

फिल्म की कहानी

 

इमरान हाशमी ने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा था कि- इंडियन एजुकेशन सिस्टम में हो रहे गुनाहों को ये फिल्म रेखांकित करती है. मैं इस किरदार को प्ले करने को लेकर काफी एक्साइटेड हूं और मुझे लगता है कि ये रोल मेरे करियर का लैंडमार्क साबित होगा.

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