Thursday, 17 January 2019 09:48

पहली बार चांद पर पौधे उगाने में मिली सफलता, चीन ने रोपा कपास Featured

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पहली बार चांद पर कोई पौधा उगाया गया है. चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि चैंगे-4 मिशन ने कपास का पौधा उगाने में सफलता हासिल की है. अंतरिक्ष रिसर्च के क्षेत्र में ये एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

चैंगे-4 पहला ऐसा मिशन है जो चंद्रमा के दूरस्थ स्थलों का जायजा लिया. वे जगहें जो धरती से काफी दूरी पर हैं. चैंगे-4 मिशन 3 जनवरी को चंद्रमा पर पहुंचा था. इसका उद्देश्य चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करना था. इससे पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पौधा उगाया गया था, लेकिन चंद्रमा पर नहीं. इस सफलता के बाद आने वाले दिनों में लंबे स्पेस मिशन के दौरान साइंटिस्ट पौधे उगाने की और कोशिशें करेंगे.

इसका मतलब ये हुआ है कि एस्ट्रोनॉट भविष्य में अंतरिक्ष में अपने लिए खाना उगाने में सक्षम हो सकते हैं. इससे सप्लाई के लिए जल्दी धरती पर वापस आने की जरूरत खत्म हो सकती है. चीन के मून लैंडर के जरिए कपास और आलू के बीज भेजे गए थे. पौधे सील किए हुए कंटेनर में उगाए गए हैं. पौधे उगाने में सफलता से ये भी संभावना बढ़ी है कि अंतरिक्ष में सेल्फ सस्टेनिंग एन्वायरमेंट बनाया जा सकता है.

चीन के लुनर मिनी बायोस्फेयर एक्सपेरिमेंट को इस तरह से डिजायन किया गया था जिससे फोटोसिंथेसिस और रेस्पिरेशन प्रोसेस को टेस्ट किया जा सके. इन प्रोसेस के जरिए ही इनर्जी का प्रोडक्शन होता है. ये पूरा एक्सपेरिमेंट 18 सेमी लंबे, 3 किलो के कंटेनर में हुआ. इसे चीन की 28 यूनिवर्सिटी ने मिलकर तैयार किया था.

कंटेनर के भीतर पानी, हवा की सप्लाई की व्यवस्था थी. हालांकि, साइंटिस्ट के लिए सबसे बड़ी मुश्किल टेंपरेचर को कंट्रोल में रखना था. क्योंकि चांद पर -173C से 100C के बीच तापमान में अंतर होता है.

पहली बार चांद पर कोई पौधा उगाया गया है. चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि चैंगे-4 मिशन ने कपास का पौधा उगाने में सफलता हासिल की है. अंतरिक्ष रिसर्च के क्षेत्र में ये एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

 

चैंगे-4 पहला ऐसा मिशन है जो चंद्रमा के दूरस्थ स्थलों का जायजा लिया. वे जगहें जो धरती से काफी दूरी पर हैं. चैंगे-4 मिशन 3 जनवरी को चंद्रमा पर पहुंचा था. इसका उद्देश्य चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करना था. इससे पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पौधा उगाया गया था, लेकिन चंद्रमा पर नहीं. इस सफलता के बाद आने वाले दिनों में लंबे स्पेस मिशन के दौरान साइंटिस्ट पौधे उगाने की और कोशिशें करेंगे.

 

इसका मतलब ये हुआ है कि एस्ट्रोनॉट भविष्य में अंतरिक्ष में अपने लिए खाना उगाने में सक्षम हो सकते हैं. इससे सप्लाई के लिए जल्दी धरती पर वापस आने की जरूरत खत्म हो सकती है. चीन के मून लैंडर के जरिए कपास और आलू के बीज भेजे गए थे. पौधे सील किए हुए कंटेनर में उगाए गए हैं. पौधे उगाने में सफलता से ये भी संभावना बढ़ी है कि अंतरिक्ष में सेल्फ सस्टेनिंग एन्वायरमेंट बनाया जा सकता है.

 

चीन के लुनर मिनी बायोस्फेयर एक्सपेरिमेंट को इस तरह से डिजायन किया गया था जिससे फोटोसिंथेसिस और रेस्पिरेशन प्रोसेस को टेस्ट किया जा सके. इन प्रोसेस के जरिए ही इनर्जी का प्रोडक्शन होता है. ये पूरा एक्सपेरिमेंट 18 सेमी लंबे, 3 किलो के कंटेनर में हुआ. इसे चीन की 28 यूनिवर्सिटी ने मिलकर तैयार किया था.

 

कंटेनर के भीतर पानी, हवा की सप्लाई की व्यवस्था थी. हालांकि, साइंटिस्ट के लिए सबसे बड़ी मुश्किल टेंपरेचर को कंट्रोल में रखना था. क्योंकि चांद पर -173C से 100C के बीच तापमान में अंतर होता है.

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