बिहार

बिहार (10)

जमुई जिले के कौआकोल से अगवा  तीनों युवकों की हत्या के बाद  उनकी क्षत विक्षत लाश  थाना क्षेत्र के भोरमबाग गांव के पास पहाड़ी के ऊपर झाड़ी में मिली। इस घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों के शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए नवादा भेज दिया है। गया के शेरघाटी थानाक्षेत्र के पंडौल गांव के निकट बधार में दो युवकों की गला काट कर हत्या कर दी गई। दोनों युवकों के शव बुधवार की सुबह दरियापुर-गुरुआ रोड से पंडौल गांव को जोड़ने वाले सम्पर्क मार्ग के किनारे गड्ढे में मिले हैं। सुबह में युवकों के शव पाए जाने की सूचना पर आस-पास के लोग भी मौके पर जुटे और मृतकों की पहचान करने की कोशिश की। दो शवों के मिलने पर आस पास के इलाके में सनसनी फैल गई है। 

जानकारी के अनुसार, 24 मई की शाम कौआकोल थाना क्षेत्र के कदहर गांव के समीप नाटी नदी के पुल के पास से जमुई जिले के सिकन्दरा निवासी राजकुमार यादव उर्फ पल्लू, जितेन्द्र उर्फ रिंकू और विक्की रजक का अपहरण कर लिया गया था। वे तीनों बाइक से जा रहे थे। इस मामले में पुलिस के हाथ कई दिनों से खाली थे। पुलिस को कोई भी ठोस सुराग नहीं मिल सका था। शक की सुई शराब माफियाओं की तरफ घूम रही थी। कयास लगाया जा रहा था कि शराब के धंधे से जुड़े माफिया आपसी विवाद को लेकर उन्हें अगवा कर सकते हैं।

पुलिस ने इस मामले में एक दर्जन से अधिक लोगों को कौआकोल, सिकंदरा व मोकामा से पूछताछ के लिए उठाया भी, लेकिन किसी से भी उनके अगवा होने के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी थी। इस बीच कौआकोल में तीनों की लाश मिलने के बाद सनसनी फैल गई। कौआकोल थानाध्यक्ष ने बताया कि पहाड़ी के ऊपर झाड़ी से तीनों का शव बरामद कर लिया गया। तीनों की हत्या की गई है। इस मामले की जांच की जा रही है।

वहीं दूसरी ओर गया के शेरघाटी थानाक्षेत्र के पंडौल गांव के निकट बधार में दो युवकों की गला काट कर हत्या कर दी गई। दोनों युवकों के शव बुधवार की सुबह दरियापुर-गुरुआ रोड से पंडौल गांव को जोड़ने वाले सम्पर्क मार्ग के किनारे गड्ढे में मिले हैं। सुबह में युवकों के शव पाए जाने की सूचना पर आस-पास के लोग भी मौके पर जुटे और मृतकों की पहचान करने की कोशिश की। दो शवों के मिलने पर आस पास के इलाके में सनसनी फैल गई है। 

शेरघाटी के एएसपी रवीश कुमार ने बताया कि दोनों शवों को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गया भेजा है। उन्होंने बताया कि मृतकों में से एक की पहचान औरंगाबाद जिले के देव थाने के भवानीपुर गांव के दिलीप प्रसाद सिंहा के पुत्र 22 वर्षीय अभिषेक कुमार के रूप में की गई है। दूसरा मृतक भी उसी गांव का बताया जाता है। पुलिस को मिले इनपुट के अनुसार दोनों चचेरे भाई हैं। घटनास्थल से पुलिस को हत्या के लिए उपयोग किए गए तेज धार वाले दो कटार भी मिले हैं। पुलिस ने देव थाने के मृतक के परिजनों को घटना की जानकारी दी है। इससे पूर्व एएसपी ने शेरघाटी और गुरुआ थाने की पुलिस के साथ मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का जायजा लिया। 

एएसपी ने बताया कि इस हादसे के पीछे पुरानी दुश्मनी की बात सामने आ रही है। उन्होंने मृतकों के किसी वाहन के चालक-खलासी होने की आशंका से इनकार किया है। स्थानीय चश्मदीदों के मुताबिक गला कटा होने के बावजूद घटनास्थल पर खून नहीं मिला है, जिससे प्रतीत होता है कि हत्या किसी दूसरे स्थान पर की गई है और शवों को सुनसान सड़क पर फेंका गया है। पुलिस मृतक के परिजनों के आने का इंतजार कर रही है।

 

 बिहार की पांच संसदीय सीटों - दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर (सु), बेगूसराय व मुंगेर में मतदान शुरू हो गया है। इसके साथ ही आज बिहार की कुल 40 में 19 सीटों यानी लगभग आधी पर मतदान हो जाएगा। बची हुई 21 सीटों पर चुनाव आगे के तीन चरणों में होगा। गौरतलब है कि बिहार में कुल 7 चरणों में मतदान होना है।

चतुर्थ चरण में सूबे की कई दिग्गज मैदान में हैं। इसी चरण के नतीजे बेगूसराय में भाजपा के गिरिराज सिंह, भाकपा के कन्हैया कुमार व राजद के तनवीर हसन तथा मुंगेर में राज्य सरकार में मंत्री सह जदयू प्रत्याशी राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह एवं कांग्रेस प्रत्याशी नीलम देवी के भाग्य का फैसला करेंगे। नीलम देवी मोकामा से निर्दलीय विधायक अनंत सिंह की पत्नी हैं।

उधर, उजियारपुर में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के सामने रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा चुनाव मैदान में हैं। गत लोस चुनाव में रालोसपा एनडीए की सहयोगी थी। समस्तीपुर में केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के भाई और लोजपा प्रत्याशी रामचंद्र पासवान एवं कांग्रेस के अशोक राम, तो दरभंगा में राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी एवं भाजपा के गोपालजी ठाकुर के बीच कड़ा मुकाबला है। इनके साथ ही इस चरण में कुल 66 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। मतदाता इनके बीच से ही अपने पांच जनप्रतिनिधि का चुनाव करेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक 48.50% मतदान हो चुका है।

 

गुरुवार को पाटलिपुत्रा लोकसभा से भाजपा और राजद के प्रत्याशियों ने नामांकन किया। बड़े नेताओं ने जैसे ही नामांकन परिसर में कदम रखा सारे नियम छोटे हो गए। चुनाव आयोग ने नामांकन परिसर में प्रवेश पर सख्त नियम बना रखे हैं। जैसे नामांकन परिसर की बैरिकेडिंग में केवल प्रत्याशी सहित 10 लोग ही प्रवेश करेंगे। 100 मीटर पहले ही सभी समर्थक रोक लिए जाएंगे। 4 प्रस्तावक ही नामांकन कक्ष में जाएंगे। गुरुवार को पहले राजद प्रत्याशी मीसा भारती नामांकन करने पहुंचीं। उनके साथ सैकड़ों समर्थक भी नामांकन परिसर में दाखिल हो गए। चार की जगह कई लोग चले गए। यही हाल भाजपा उम्मीदवार रामकृपाल यादव के समर्थकों ने भी किया। यही नहीं, एक ही समय पर दोनों का आमना-सामना भी हुआ तो समर्थकों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। बड़े नेताओं को देख प्रशासन भी मौन रहा। 

ये है नियम   
10 लोग को बैरिकेडिंग के अंदर प्रवेश करने की है अनुमति  
चार प्रस्तावक ही नामांकन कक्ष तक जाएंगे          
नामांकन परिसर के 100 मी. पहले ही सभी समर्थक के प्रवेश पर रोक 

ऐसे टूटे नियम
सैकड़ों समर्थक बैरिकेडिंग के अंदर प्रवेश कर गए
25 से 30 लोग नामांकन कक्ष तक पहुंच गए
नामांकन परिसर द्वार तक सैकड़ों समर्थकों की नारेबाजी

रामकृपाल ने 1:45 पर पूरा कर लिया नामांकन
रामकृपाल यादव ने अपने तीन प्रस्तावकों के साथ दोपहर 1:45 बजे नामांकन पूरा कर लिया। इसके बाद बाहर निकलने पर उन्होंने कहा कि जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता इसका जवाब देगी। फिर यहां से एसकेएम में आयोजित राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने चले गए। 

रूट प्लान फेल, भिड़ गए समर्थक
मीसा भारती एक घंटे बाद नामांकन कक्ष से बाहर निकलीं। उन्होंने कहा कि पहली बार उनके पिता उनके साथ नहीं हैं। उनकी फोटो लेकर नामांकन करने पहुंची हैं। इसके बाद बाहर निकलते समय समर्थकों ने बाएं के बदले दाहिने लेन को जाने के लिए चुन लिया, जो इंट्री गेट से परिसर आने का रास्ता है। पुलिस के मुस्तैद नहीं होने से भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल और राजद प्रत्याशी मीसा भारती के समर्थक एक ही लेन पर आ गए। समर्थकों के बीच नोकझोंक भी हुई। समर्थकों ने किसी तरह रामकृपाल यादव को इससे बाहर खिंचा। दोनों तरफ के समर्थक एक-दूसरे के सामने नारे लगाने लगे। कुछ ने भिड़ने की भी कोशिश की।

 

राजद ने पार्टी के अधिक विधायकों वाली सीटों पर दाव खेला है। दो चरण के चुनाव में तो राजद के सिम्बल पर मात्र तीन ही उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन सही मायने में तीसरे चरण के चुनाव से राजद के विधायकों की अग्निपरीक्षा होनी है। इन पांच चरणों के चुनाव में पार्टी ने 16 संसदीय क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इन 16 क्षेत्रों में पार्टी के 40 विधायक हैं। 

खास बात यह है कि पार्टी के इन विधायकों में पांच तो खुद ही किसी ना किसी संसदीय क्षेत्र से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। अपने विधानसभा क्षेत्र में अधिक बढ़त लेने की चुनौती खुद इन उम्मीदवारों पर होगी। इसी के साथ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव दोनों का विधानसभा क्षेत्र हाजीपुर संसदीय क्षेत्र में है।  जिन संसदीय क्षेत्रों में राजद के अधिक विधायक हैं, वहां से उसके उम्मीदवार भी अधिक हैं। एक संसदीय क्षेत्र में औसतन छह विधानसभा क्षेत्र होते हैं। दूसरे चरण के बाद राजद के जो भी उम्मीदवार बचे हैं, उनमें 10 संसदीय क्षेत्रों में पार्टी के आधे या उससे अधिक विधायक हैं। शेष छह संसदीय क्षेत्र में शिवहर, गोपालगंज, सीवान और बक्सर संसदीय क्षेत्र ऐसा है जहां राजद के सिर्फ एक-एक विधायक ही हैं। जहानाबाद और सारण संसदीय क्षेत्र में राजद के चार-चार विधायक हैं। 

बेगूसराय समेत आठ सीटों पर तीन-तीन विधायक
सीतामढ़ी, मधेपुरा, दरभंगा, वैशाली, महाराजगंज, हाजीपुर, बेगूसराय और पाटलीपुत्र संसदीय क्षेत्रों में राजद के तीन-तीन विधायक हैं। इनमें दरभंगा से चुनाव लड़ रहे अब्दुल बारी सिद्दीकी अपने क्षेत्र के अलीनगर विधान सभा क्षेत्र का वर्तमान में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हाजीपुर से चुनाव लड़ रहे शिवचन्द्र राम खुद अपने क्षेत्र के राजापाकड़ से विधायक हैं। सुरेन्द्र यादव जहानाबाद संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशी हैं और वह खुद बेलागंज से विधायक हैं। इसी प्रकार गुलाब यादव अपने संसदीय क्षेत्र झंझारपुर के झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र और चंद्रिका राय अपने क्षेत्र सारण के परसा विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं। 

पिछले आठ दिनों से जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मधेपुरा में कैंप किए हुए हैं। वहीं से दूसरे और तीसरे चरण में होने वाले चुनाव से संबंधित सीटों पर अपने प्रचार अभियान को अंजाम दे रहे हैं। अमूमन रोज चार चुनावी सभा करने के बाद रात्रि विश्राम वे मधेपुरा में करते हैं। गत नौ अप्रैल को वे पटना से रवाना हुए थे, तभी से लौटे नहीं हैं। 

एनडीए के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की मुहिम में मुख्यमंत्री लगे हैं और वहीं से अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।  भाषणों के जरिये जनता से अपने किये काम और सेवा की मजदूरी के रूप में एनडीए उम्मीदवारों के लिए वोट मांग रहे हैं। दूसरे चरण के चुनाव की खास बात ये है कि सभी पांचों सीटों पर एनडीए के तहत जदयू के उम्मीदवार मैदान में हैं। इस लिहाज से यह चरण जदयू के लिए और ही खास हो जाता है। मधेपुरा में रात्रि विश्राम और अगले सुबह से शाम तक चुनाव प्रचार-प्रसार में मुख्यमंत्री लग जाते हैं। 

मधेपुरा में भी तीसरे चरण में चुनाव है। मधेपुरा से जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव इस बार राजद से चुनाव मैदान में हैं। यहां से वर्तमान सांसद पप्पू यादव जाप पार्टी से खड़े हैं। जदयू की ओर से दिनेश चंद्र यादव मैदान में हैं। इन कारणों से इस सीट पर देश की नजर है। दूसरे चरण की बात करें तो किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, पूर्णिया और बांका में 18 अप्रैल को मतदान होने हैं। 

यहां के लिए 16 अप्रैल की शाम को चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा। पूर्णिया में वर्तमान सांसद जदयू के ही संतोष कुशवाहा मैदान में हैं। तीसरे चरण का मतदान 23 अप्रैल को झंझारपुर, सुपौल, खगड़िया, अररिया और मधेपुरा में है। 

बिहार बोर्ड की ओर से कंपार्टमेंटल सह विशेष परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन गुरुवार से भरे जा सकेंगे। अधिकतम दो विषयों में फेल होने वाले परीक्षार्थी ही कंपार्टमेंटल परीक्षा दे सकेंगे। वहीं जो परीक्षार्थी मैट्रिक वार्षिक परीक्षा में किसी कारण से शामिल नहीं हो पाए, वे विशेष परीक्षा के लिए आवेदन करेंगे। आवेदन 11 अप्रैल से 16 अप्रैल के बीच ऑनलाइन भरा जाएगा। 

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मानें तो इसके लिए परीक्षा मई महीने में आयोजित की जाएगी। बिहार बोर्ड द्वारा माध्यमिक कम्पार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा के रिजल्ट का प्रकाशन जून महीने में करने का लक्ष्य रखा गया है। फॉर्म शिक्षण संस्थानों के प्रधान के माध्यम से भरा जाना है। ज्ञात हो कि विशेष परीक्षा में मैट्रिक परीक्षा के नियमित, स्वतंत्र कोटि के परीक्षार्थी, जिन्होंने परीक्षा फॉर्म भरा, लेकिन शिक्षण संस्थान के प्रधान की लापरवाही के कारण उनका फॉर्म ऑनलाइन नहीं हो सका और इस वजह से परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए, वे विशेष परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। साथ ही पूर्ववर्ती कोटि के परीक्षार्थी, जिनके द्वारा फॉर्म भरा गया, लेकिन शिक्षण संस्थान के प्रधान की लापरवाही के कारण उनका फॉर्म पूर्ववर्ती कैंडिडेट के बदले कम्पार्टमेंटल कर दिया गया वे इस परीक्षा में शामिल हो पाएंगे।

इंप्रूवमेंट के लिए अंतिम मौका 

इंप्रूवमेंट में वैसे परीक्षार्थी, जिन्होंने मैट्रिक परीक्षा, 2017 अथवा 2018 में पास की और जो मैट्रिक परीक्षा, 2019 में समुन्नत परीक्षार्थी के रूप में सभी विषयों की परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन पत्र एवं शुल्क अपने शिक्षण संस्थान में जमा किया, लेकिन उनका ऑनलाइन परीक्षा आवेदन नहीं भरा जा सका। ऐसे परीक्षार्थी भी शामिल हो सकते हैं।.

 

आज बिहार में पहले चरण के चार लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों एवं नवादा विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव में मतदान शुरू हो चुका है। गया, औरंगाबाद, नवादा और जमुई में कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम के खराब होने की सूचना मिली। वहीं औरंगाबाद के देव के ढिबरा थाना क्षेत्र के भलुआहि के समीप नकली ईवीएम बरामद होने की भी खबर है। इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। अभी तक जो खबर मिल रही है उसके अनुसार दोपहर 3 बजे तक औरंगाबाद में 38.50% गया में 44%, नवादा में 43% और जमुई में 41.34 फीसदी मतदान हो चुका है। इस बीच नवादा में रोह के मिडिल स्कूल सुंदरा स्थित बूथ नंबर 57, 58 व 59 पर दो गुटों में झड़प होने की खबर है। इस दौरान दो राउंड फायरिंग भी हुई है। 

एडीजी मुख्यालय कुंदन कृष्णन निर्वाचन कार्यालय पहुचें। उन्होंने कहा कि इमामगंज और औरंगाबाद में बम बरामद किया गया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण नक्सलियों को घेर कर रखा गया है। कई जगहों पर मतदान को प्रभावित करने की कोशिश गई है। पुलिस इन सब पर नजर रखे हुए है।

लोकसभा चुनाव में जीतनराम मांझी, सुशील कुमार सिंह, चिराग पासवान, उपेंद्र प्रसाद, विभा देवी एवं चंदन कुमार सहित 44 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मतदाता करने जा रहे हैं। वहीं नवादा विस उपचुनाव में जदयू के कौशल यादव व हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के धीरेंद्र कुमार सिन्हा सहित आठ उम्मीवारों की किस्मत का फैसला होगा।

कई जगहों पर ईवीएम में आयी खराबी

मतदान शुरू होते ही बिहार में कई बूथों से ईवीएम में खराबी की खबर सामने आ रही है। शेखोपुर डीह गांव का एवीएम मशीन नंबर 33 खराब हो गया। जबकि गया में भी कुछ जगहों पर ईवीएम गड़बड़ी की खबर है। बोधगया बूथ संख्या 18 राजापुर मिडिल स्कूल पर ईवीएम खराब। मतदानकर्मियों ने सेक्टर पदाधिकारी को दी है जानकारी। ईवीएम का कंट्रोल यूनिट नहीं कर रहा है काम। नवादा के सिरदला के बूथ नंबर 114 और 115 उपरडीह में ईवीएम खराबी की वजह से नहीं शुरू हुआ मतदान।

गया में मिला आईईडी

उधर, गया में औरंगाबाद लोकसभा के इमामगंज के सलैया बूथ के पास आइईडी मिला। लोकसभा चुनाव को लेकर औरंगाबाद में नौ, गया में 13, नवादा में 13 एवं जमुई में नौ उम्मीदवार मैदान में हैं। 11 निर्दलीय भी भाग्य आजमा रहे हैं। मतदान की प्रक्रिया सुबह सात बजे से शुरू होगी। इस चरण में 70 लाख 66 हजार 40 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 36 लाख 91 हजार 75 पुरुष तथा 33 लाख 60 हजार 722 महिला मतदाता एवं 225 थर्ड जेंडर हैं। 

अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बुधवार को निर्वाचन कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मतदान को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थित सभी बूथों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गयी है। कुल 7486 मतदान केंद्रों पर एक-एक ईवीएम एवं वीवी-पैट लगाए गए हैं। सभी लोकसभा क्षेत्रों में एक-एक सामान्य प्रेक्षक, व्यय प्रेक्षक व दो पुलिस प्रेक्षक तैनात किए गए हैं।

सिंह ने बताया कि मतदान के तीन दिन पहले से एयरफोर्स के दो हेलीकॉप्टरों के माध्यम से हवाई रेकी करायी जा रही है, जो कि मतदान के एक दिन बाद तक जारी रहेगी। इसके साथ ही 350 बूथों पर लाइव वेबकास्टिंग एवं 350 बूथों पर वीडियोग्राफी एवं माइक्रो ऑब्जर्वर की व्यवस्था की गयी है। औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र के कुंटुबा, रफीगंज, गरुआ, इमामगंज और टेकारी में चार बजे तक ही मतदान होगा, जबकि औरंगाबाद में छह बजे तक। गया के शेरघाटी, बाराचट्टी और बोधगया में चार बजे तक वोट पड़ेंगे। नवादा के रजौली व गोविंदपुर, जमुई के शेखपुरा को छोड़कर शेष सभी क्षेत्रों में चार बजे तक मतदान होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार प्रवीण कुमार गुप्ता भी मौजूद थे। 

मतदान के दौरान किसी भी गड़बड़ी को लेकर कोई भी मतदाता सी-विजिल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम स्थित फोन नंबर 0612-2215978 पर भी शिकायत दर्ज करायी जा सकती है। 0612-2215611 पर फैक्स भी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

 12वीं के बाद अब बिहार स्कूल एजुकेशन बोर्ड (BSEB)  10वीं (BSEB Matric Results) के नतीजे  6 अप्रैल को जारी करेगा। बोर्ड ने इसकी सूचना जारी करते हुए कहा है कि बिहार बोर्ड के नतीजे 6 अप्रैल को 12.30 बजे घोषित किए जाएंगे।

 जो स्टूडेंट्स इन परीक्षाओं में शामिल हुए थे वो बिहार बोर्ड 10वीं के नतीजे (Bihar Board 10th Result 2019) की ऑफिशियल वेबसाइट bsebinteredu.in और examresults.net पर चेक कर सकेंगे। 

10वीं की परीक्षा 28 फरवरी को समाप्त हुई थी। बोर्ड सूत्रों के मुताबिक रिजल्ट अगले कुछ दिनों में जारी हो जाएगा। बिहार बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने कहा, 'चीजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, हमें उम्मीद है कि रिजल्ट एक सप्ताह में जारी कर दिया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि 12वीं का रिजल्ट बेहतर आने से 10वीं का रिजल्ट भी बेहतर आने की उम्मीद बढ़ गई है।

बिहार बोर्ड की मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2019 में 16 लाख 60 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इस बार बिहार बोर्ड ने रजिस्ट्रेशन से लेकर बोर्ड फॉर्म भरने की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कराई थी। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने के लिए कई सख्त कदम भी उठाए गए थे। 

Bihar Board Metric Result 2019: बिहार स्कूल एजुकेशन बोर्ड इस सप्ताह बिहार बोर्ड मैट्रिक के नतीजे भी जारी कर सकता है। नतीजे बिहार बोर्ड की वेबसाइट biharboard online.bihar.gov.in पर चेक किए जा सकेंगे। 

सारण में सियासत का सिक्का जेल में बंद तीन महारथियों लालू, प्रभुनाथ और शहाबुद्दीन का चलता रहा है। ये तीनों एक ही पार्टी, राजद के हैं और अभी तीनों ही जेल में हैं। सभी के खिलाफ सजा के फैसले के बाद इनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगी है।

ऐसे तीन महारथियों को लेकर सारण को छोड़ शायद ही देश के किसी भाग में ऐसा अजब संयोग देखने को मिलेगा पर कद्दावर लालू प्रसाद, शहाबुद्दीन और प्रभुनाथ सिंह के रसूख को सारण की सियासत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लोकसभा चुनाव 2019 में ये तीनों ही सदेह मौजूद नहीं रह पायेंगे पर तीनों के साथ समर्थकों की भावानाएं जुड़ी हैं। इलाके में इनकी गैरमौजूदगी सियासी चर्चा का विषय बनी है।

जेपी आंदोलन में तपकर सियासत में चमके लालू  
छात्र राजनीति से जेपी आंदोलन में तपकर सियासत में चमके लालू प्रसाद की जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों  सारण ही रहा है। राज्य की राजनीति से लेकर केन्द्रीय राजनीति तक का सफर तय करने में सारण का नाम उनकी परछाईं की तरह जुड़ा रहा। इलाके में उनका सिक्का ऐसा चला कि जिसे चाहा, विधायक बना डाला और जिसे पसंद किया उसे दिल्ली दरबार में भेज दिया। सियासत का कालचक्र उनके ईद-गिर्द घूमता रहा। तीन बार  विधायक हुए तो 1977 से लेकर 2009 (आखिरी बार) तक की अवधि में चार बार सांसद बने। बिहार के मुख्यमंत्री बने तो सारण के हर आदमी का सीना चौड़ा हुआ। यहां की मिट्टी से  निकले लालू प्रसाद का कद और चेहरा आज भी महागठबंधन प्रत्याशियों के समर्थन मांगने का आधार है।    

बेटा लड़ रहा चुनाव तो याद आये प्रभुनाथ
सारण समेत बिहार के कई हिस्सों में प्रभुनाथ सिंह की एक समय में अपनी शक्ति थी। विधायक अशोक सिंह की हत्या के जुर्म में हजारीबाग जेल में बंद प्रभुनाथ की शक्ति का सियासत में खास मौकों पर भले ही क्षरण हुआ हो पर धरातल पर प्रभाव आज भी दिखता है। 1985 में निर्दलीय विधायक और 1998 में महाराजगंज से वे पहली बार सांसद बने। अपने भाई को तीन बार व बेटे रणधीर को भी एक बार विधायक बनवाना उनकी ताकत की ही मिसाल है। सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा उठाने व संसद में भोजपुरी में शपथ लेने के आग्रह से भी वे चर्चा में रहे। इस बार महाराजगंज सीट से उनके बेटे रणधीर कुमार सिंह महागठबंधन के प्रत्याशी हैं। उनकी उम्मीदवारी के बाद से ही एक बार फिर लोगों में प्रभुनाथ की याद ताजा हो गयी है। 

जेल से चुनाव लड़कर भी जीते शहाबुद्दीन 
पूर्व राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद की धरती सीवान में दो बार विधायक और चार बार सांसद रहे शहाबुद्दीन कभी सीवान का पर्याय हुआ करते थे। ऐस कि सीवान की चर्चा होते ही लोग कह बैठते-अच्छा, शहाबुद्दीन वाला सीवान।  वे आपराधिक, आरोप-प्रत्यारोप, अपनी दबंगता और सियासी शक्तियों की वजह से हमेशा चर्चा में रहे। 2004 का चुनाव वे जेल से ही जीते।  अपनी अदालत लगायी और उसके जरिये पारिवारिक, जमीनी  व वैवाहिक मसलों का निपटारा कर सुर्खियों में बने रहे। उस दौर में वे इतने ताकतवर थे कि डॉक्टरों को परामर्श व निजी स्कूलों की फीस तक भी तय करते थे। उनकी बेगम हिना शहाब तीसरी बार दांव लगा रही हैं। तिहाड़ में उनसे मिलने-जुलने वालों के जरिये सीवान तक संवाद आज भी पहुंचता है। ऐसे में इस बार बिछी सियासी बिसात में उनकी भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता। 

 लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश में बेहतर संभावना वाली सीटों की पहचान करने में कांग्रेस जुट गई है। पार्टी का नवगठित रिसर्च विभाग यह काम कर रहा है। अगर महागठबंधन में सहमति बनी, तो कांग्रेस पूर्व में लड़ी सीटों से इनकी अदला-बदली करेगी। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।

बिहार में मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा, झंझारपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय एवं खगड़िया ऐसी कुछ सीटें हैं, जिसके सामाजिक समीकरण कांग्रेस को सूट करते हैं। कांग्रेस ने पिछली बार इनमें से किशनगंज, पूर्णिया एवं समस्तीपुर में ही अपने प्रत्याशी उतारे थे। इन 11 सीटों में से केवल कटिहार एवं किशनगंज महागठबंधन की सीटिंग सीटें हैं। 

सीमांचल पर भी खास नजर

हालांकि किशनगंज से सांसद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मौलाना असरारूल हक का निधन हो चुका है, जबकि कटिहार से राकांपा के टिकट पर चुनाव जीते तारिक अनवर अब कांग्रेस में हैं। तारिक अनवर को बिहार की राजनीति में एक कद्दावर अल्पसंख्यक चेहरा माना जाता है। सीमांचल में उनकी अच्छी पकड़ है। इतना ही नहीं, सीमांचल की चार सीटों कटिहार, अररिया, पूर्णिया एवं किशनगंज मुख्य रूप से अल्पसंख्यक बहुल हैं। राजद सांसद मो. तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद सीमांचल की राजनीति में तारिक अनवर और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं

रिसर्च विभाग के अध्यक्ष आनंद माधव ने कहा कि पिछली बार लड़ी 12 सीटों के अलावा भी कुछ और सीटों का विस्तृत डाटा इकट्ठा किया जाएगा। ‘विनिबिलिटी फैक्टर’ के आधार पर हम अपनी पसंदीदा सीटें चिह्नित करेंगे और अपनी अनुशंसा आला कमान को सौंपेंगे। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की मंशा है कि सभी घटक दल एक-दूसरे के लिए पहले से बेहतर वोट ट्रांसफर कर सकें। यह तभी मुमकिन है जब सीटों का चयन हर पहलु को मद्देनजर किया जाए।

 

2014 में ये सीटें थी कांग्रेस के कोटे में

  1. सासाराम 2. किशनगंज 3. औरंगाबाद 4. सुपौल 5. हाजीपुर 6. पूर्णिया 7. पटना साहिब 8. नालंदा 9. समस्तीपुर 10. गोपालगंज 11. मुजफ्फरपुर 12. वाल्मिकीनगर


 

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